पहली गलती और इसका नतीजा

पहली गलती –




एक बहुत ही खुशहाल गांव रत्नपुर था। वहाँ सभी लोग मिल जुल कर रहते थे।किसी के घर में किसी भी चीज की कमी ना थी। सभी में प्यार था। किसी भी तरह का क्लेश न था। पास के गांव में एक चोर और उसका मित्र रहता था। चोर चोरियां करता था परन्तु उसका मित्र बहुत ही ईमानदार था। वह जानता था कि उसका मित्र चोर है पर बेरोजगार होने के कारण वह स्वयं उस पर निर्भर था। इसी वजह से वह किसी के सामने यह राज जाहिर नहीं करता था। उसका जीवन आनंदपूर्वक बीत रहा था। वहीं चोर एक ईमानदार मित्र के साथ होने के कारन कभी संदेह का पात्र नहीं बना। इसी का लाभ मिलने से वह चोर अपने मित्र को कभी भी बोझ नहीं समझता था।


एक दिन उस चोर को रत्नपुर गांव के बारे में पता चला तो वह उस गाँव में चोरी करने की योजना बनाने लगा। रात को वह उस गांव में गया और चोरी कर के वापस आ गया। चोरी में उसे इतना सामान मिला जितना उसने आज तक देखा भी नहीं था। पर अभी भी उसे लग रहा था कि वह और सामान ला सकता था। इस बारे में उसने अपने मित्र से बात की पर उसने किसी भी प्रकार की सहायता से साफ़ इनकार कर दिया।
उधर गांव में पहली बार चोरी की घटना होने के कारन यह खबर आग की तरह फ़ैल गयी। पर प्यार और सदाचार की भावना होने के कारण सब लोगों ने उस परिवार की सहायता की और उन्हें दिलासा दी। इस घटना क बाद सब चौकन्ने हो गए थे क्योंकि उन्हें इस बात का पता था की चोरी किसी बाहर के व्यक्ति ने ही की थी।
अगली रात फिर चोर चोरी की योजना बना कर उस गांव में गया और खूब सामान चोरी कर लाया लेकिन पिछली बार  की तरह अब भी उसके मन में यही कसक थी की वह और सामान ला सकता था परंतु अपनी क्षमता के अनुसार ही ला सका। जैसे तैसे वह अपने घर पहुँचा। उसका मित्र देख के हैरान था कि दो दिन से घर में बहुमूल्य सामान काफी मात्रा में आ रहा था। यह देख उसका मन बेईमान होने लगा। पर मन दबा कर उसने कुछ कहा नहीं। और रत्नपुर में दुबारा चोरी की घटना हो जाने से गाँव वाले इस बात पर शर्मिंदगी महसूस कर रहे थे कि वे अपने गांव की सुरक्षा भी नहीं कर सकते। तब उन्होंने गोपनीय ढंग से चोर को पकड़ने की योजना बनायी।






अगले दिन चोर ने अपने मित्र पर साथ चलने का दबाव डाला और चोरी में मिलने वाली चीजों के बंटवारे की बात की तो उसका ईमान डोल गया और उसने साथ जाने का प्रस्ताव सहर्ष ही स्वीकार कर लिया।
जैसे ही संध्या हुई दोनों घर से निकले। उस चोर ने अपने मित्र को चोरी के कुछ गुण बताये। ताकि वह कोई गलती ना करे। जब दोनो रत्नपुर पहुँचे तो गांव वालों ने छिप कर उन पर नजर रखना आरम्भ कर दिया। थोड़ी दूर जाते ही चोर को इस बात का आभास हो गया की उनका पीछा किया जा रहा है। पर उसके मित्र को इस बारे में नहीं पता था, वह तो बहुत डरा हुआ व घबराया हुआ था।



एक घर के पास पहुंच कर चोर ने अपने मित्र को दीवार फांदने को कहा। जैसे ही वह दीवार फांद कर घर में घुसा चोर चालाकी दिखाते हुए गांव वालों को चकमा देकर गांव से बाहर निकल आया और रातों रात अपना सारा सामान समेटकर अपना गांव छोड़कर चला गया। वहां रत्नपुर में उसका मित्र घर में तो घुस गया था पर जब उसने देखा की उसका मित्र कुछ देर तक ना आया तो उसके पसीने छूटने लगे। वह थोडा आगे बढ़ा तो उसके पैर एक बाल्टी से टकरा गए और बाल्टी गिरने के कारण शांत अँधेरे में बहुत तेज आवाज हुई। आवाज सुनते ही सारे गांव वाले उस घर के बाहर आ गए और उसे पकड़ लिया।





वह घबराया हुआ बोल रहा था कि उसने कुछ नहीं किया और माफ़ी मांगने लगा। पर गांव वालों ने उसे माफ़ नहीं किया और पहले हुई दो चोरियों का इल्जाम भी उसी पर डाल दिया गया।पूछताछ पर उसने अपने चोर मित्र के बारे में बताया। उसको ढूंढने की कोशिश की गई, पर बहुत शातिर होने के कारण वह हाथ नहीं आया।
और पहली बार चोरी करने आये उस इंसान को वह सजा भी काटनी पड़ी जो जुर्म उसने किया ही नहीं था। वह बार बार कह रहा था की मैंने आज तक ऐसा काम नहीं किया, आज पहली बार मैंने ऐसा करने की कोशिश की, कृपया मुझे माफ़ कर दीजिये। पर किसी ने उसकी बात नहीं सुनी। और उसे उपर्युक्त सजा दी गयी।


यही प्रवृति हम लोगों में भी होती है की हम जानते तो हैं की हमारे आसपास कौन कौन गलत काम करता है, फिर भी हम उसका विरोध नहीं करते और ना ही उसकी जानकारी किसी को देते हैं। जो भविष्य में हमारे लिए खतरनाक साबित होता है। जब हमें उस व्यक्ति से कोई परेशानी होती है तब ही हम उसका विरोध करते हैं। ऐसे में इस बात का बहुत कम अंदेशा रहता है की हमे इन्साफ मिलेगा।


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कई बार तो इसका नतीजा यह होता है की हमारा मन भी ऐसे गलत कार्यों की तरफ आकर्षित होने लगता है, और हम लालचवश वह काम करने का प्रयास करते हैं और पकडे जाने पर क्षमा याचना करते हैं। पर गलत कार्य हमेशा गलत ही होता है और सबसे बड़ी गलती पहली गलती होती है। पहली गलती के बाद ही इंसान गलतियां करने का आदी बनता है। इसलिए हमें दूसरों की गलतियों से सीख लेनी चाहिए और हमेशा खुद को सत्य की ओर प्रेरित करना चाहिए और प्रयास करना चाहिए की हम अपने जीवन में ऐसी कोई पहली गलती ना करें जो भविष्य में हमें अंधकार की ओर ढकेल दे।


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